Wednesday, November 15, 2017

खुशिया सलामत सनम

खुशिया सलामत सनम

मेरे दर्द पर तेरी खुशिया सलामत सनम
दर्द भी खुशियों की तरह लगता मुझे
ना दिल को कभी ऐतराज करना मेरे लिए
यह मेरे दिल का नजराना समझ

तेरी नजरो में मेरे लिए नफ़रत भर दे
वह खुशियों की सजा त्यौहार मेरे लिए
तू गम ना करना मेरी तनहाई का
बादल तले सासे भरके जी लूंगा छुप जाती

दिल आवारा हो गया तेरे बिना
उसका भी गम पि पिल्या है में ने
अब ढूंढ नेका क्या धरती पर
जो मिलता वो खो चुका हूँ में

वो दिलबर फिक्र ना करना याद रखना
यह दिवानेके पाछे ना आना कभी
यह माँ से बना गया गलतीसे
दिल की आग में खुद जल जाता दीवाना