Tuesday, November 14, 2017

सजाये खाब



सजाये खाब

सजाये खाब सुनकर
दिल बेचैन हुवा कसकर
करे तो क्या करे अब
सजाये भुगतना है अब
बेहोशी के जाल में हमें ना सुलाना
होश में रहे तो याद रहेगा सपना

ये वह खाब मिलन के
दिन रात हमने देखे 
आज सब होंगे पुरे 
ना छोड़ेंगे अब अधूरे
बेहोशी के जाल में हमें ना सुलाना

होश में रहे तो याद रहेगा सपना

इतनेमें आशिकी सारी ,
जमाने की खूबसूरती है भरी
आजन्म तुम्हारी कैद में ,
जखड़लो जीवन की डोर में
बेहोशी के जाल में हमें ना सुलाना

होश में रहे तो याद रहेगा सपना


प्यासे है मुस्कान की
कसम है शर्मीली गुल की
हमें तो आस है उनकी
एक घुट बस अमृत की
बेहोशी के जाल में हमें ना सुलाना

होश में रहे तो याद रहेगा सपना

ओ शराबी झिलमिल आँखे 
जैसे हम झील के किनारे है बैठे 
नैया में रहे मशगूल हम 
साँसों की पतवार चलाये हम 
बेहोशी के जाल में हमें ना सुलाना
होश में रहे तो याद रहेगा सपना


ना झुकाओ मुख इस तरह 
ओ और भी निखर जाए
अदाएं झुक गयी तुम पर 
शर्मीली नयन बन गए 
क्या परखा तूने दिल मेरा 
ये बात मन को चुबती है