Saturday, November 18, 2017

आशिकी




आशिकी

बिना दाम खरीद लिए सारा  दिल 
ना उनको प्यार मिला , ना तुझे चैन 

जलती रही तमन्नाये आसुओ के घुट पीके 
ना दिल प्यार से परोसा, शम्मा जलती रही 

क्या यह तेरा मुहोब्बत का जाल था ?
या अल्लडपन का अदाओसे भरा नशा 

जुल्म ये जख्म दिए तूने अनगिनत 
तुझे हाजिर होना होगा गुनाह काबुल करने 

कभी मुआफ नहीं करेंगे गुनाह की माला 
हर गुनाह का हिसाब देना होगा आजमी 

बना इजाजत  तुम ऐसे भाग नहीं सकते 
कर्ज का ये बोझ प्यारका कब पूरा करोगे 

बेकदर थी ये तेरी प्यार की आशिकी 
ना पूरा किया ना लौटा दिया 



छुपाया मोहोब्बत का सागर किनारा सूखा छोडके 
झुटो  से क्या पाया  रोती हुई तनहाई के अलावा 

मिथ बोलके फ़िल्मीवालोने च्युज लिया मकरंद 
जो बचा वो धो का बाजीने भेज दिया शमशान