Friday, November 17, 2017

जीवन ही है एक रंगोली



जीवन ही  है एक रंगोली 

लाल रंग जो बरसे गाली 
मन हुवा तनिक गुलाबी 
नीलवर्ण भाये नयनोमे 
या छटा और कुछ निराली 

मुस्कान में  मिलाफ है सारा 
जिसमे हँसी की फूल झड़ी 
उर जो धड़के साँसों में 
प्रेम की बने  गुलछड़ी 

गुलाबी है प्यार का द्योतक 
नारंगी है त्यागका 
हरा में है एकसंगता 
सफ़ेद में निर्मलता 

रंगोमे  तुम हमेशा भीगी 
होली और क्या निराली 
भाये तू मुझसे हरदम 
जीवन ही  है एक रंगोली 

नीला लिया आकाश ने 
पिला तो प्रकाशन 
जाम्बुनी चादर रात की 
काली नजर दुश्मनकी