Friday, November 17, 2017

साडे साती और भविष्य

साडे साती और भविष्य 

सर्व साधारण यह देखा गया है की साढेसाती का नाम सुनतेही मन में एक घबराहट होती है। मन से यह भय निकाल देना आवश्यक है। सादे साती में प्रगति मार्ग खुल जाते है और उस प्रगति के लिए आवश्यक मनस्थिति तैयार की जाती है। यह जो मनस्थिति तैयार करा ने का काम जो शनि करता है उसे हम डरते है। इसमे डरानेके भाग जो है वह
१) हमारा कोई अवमान तो नहीं करेगा ?
२) कौन कौन से कष्ट सहने पड़ेंगे ?
३) कही बदनामी तो नहीं होगी ?
४) पूजा पाठ भूलचूक से कोई गड़बड़ तो नहीं होगी ?

ऐसे बहोत से सवाल मन में निर्माण होते है। इनसे छुटकारा  लिए बहोत सामान्य नियमोका पालन करना परमावश्यक है।
१) मानवता धर्म का पालन करो। अति सामान्य जान को भी सन्मान दो।
२) आने वाले कर्म का आनंद से स्वीकार करो व  कुछ कारण मन में तैयार मत करो।
३) संघर्ष के समय खुशीसे , समझदारी से कहना मान लो।
४) सभी कार्य में गति रखो पेंडिग मत रखो।

यदि इन नियमोका पालन करोगे तो शनि की सदभावना ज्यादा रहेगी और हर कार्य में यश मिलेगा। सादे साती के आखिर में आपने किये कार्य का नामकरण प्रसिद्धि में आएगा और उसी से हमेशा के लिए जाने जाओगे।

साढेसाती कैसी देखि  जाती है ?
सभी ग्रह सूरज को भ्रमण करते है। सूरज के नजदीक वाले ग्रहोंको समय कम लगता है। सूरज से दूर ग्रहोंको ज्यादा समय लगता है। जैसे
१) बुध ८७. ९७  दिन
२) शुक्र २२४. ७  दिन
३) पृथ्वी 365. २६ दिन
४) मंगल  १. ९  साल
५ ) गुरु ११.८ ६  साल
६) शनि  २९. ४६  साल
७) हर्षल ८४. ०१  साल
८) नेप्च्यून १६४. ७९  साल
९) प्लूटो २४८. ५९  साल



आकाशाके  पूर्व से पश्चिम और वापस पूर्व तक जो नक्षत्र  भ्रमण  मार्ग है , उसके बाराह भाग किये है।  २७ नक्षत्रको इन बाराह भागो में विभाजित किया है।  यह भाग ,याने नक्षत्र अचल, स्थिर है।  चंद्र पृथ्वी को २८ दिनों में चक्कर लगाता है।  याने २८ दिनों में १२ राशि ( २७ नक्षत्र) पदार्पण cross करता है। जन्म के समय जिस राशि में चंद्र होगा वह रास व नक्षत्र  उसकी होगी। एक रास में २. २५  नक्षत्र होते है।  नक्षत्र को चार भागो में विभाजित किया है जिसको चरण कहते है। एक रास में दो राशि व एक  चरण  याने कुल मिलाके एक राशि में ९ चरण आते है
चंद्र स्वभाव दिखलाता है।  राशि से स्वभाव दिखलाता है तथा नक्षत्र चरण से त्रीव्र ता  समाविष्ट तारो की गुणधर्म नुसार सम्मिलित किया जाता है।

साधारणता  हमारा मन भविष्य पर  विश्वास रखनेके लिए तैयार नहीं होता।  सूरज जब एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करता है तब साड़ी सृष्टि नक्षत्र के गुणानुसार मोहित हो जाती है।  और यह बदलाव हमें स्पष्ट रूप से नजर आता है। कलैंडर में सूर्य नक्षत्र प्रवेश से आप उसी दिन का निरिक्षण कर सकते है।

लेकिन मन के निग्रह के आगे भविष्य की नहीं चल सकती।  मन को आग्रही बना के सात्विक रूप कर्म करे तो फल मिलता ही है , हो सकता है थोड़ा विलम्ब हो। श्रुष्टि तो ईश्वर के मन ने  बनाया हुवा खेल है। तो हमारा मन तो थोड़ा सा उसके आधीन होता ही है।