Friday, November 17, 2017

अलविदा


अलविदा 

आज वो बित गए दिन पुराने
भूल गये वो अबतक थे अपने
ना कही चाहत रखी है कुछ बाकी
ना लियी है इजाजत आझादिकि

इतने मजबूर थे क्या हमारे संग
क्या जिंदगी से थे इतने तंग
क्या प्यार में थी कुछ कमी
या मुझसे चाहिए थी आझादी

अब  ना सतायेंगे कभी तुम्हे यार
पर याद आओगे तुम बार बार
ना भूल पाएंगे तुम्हे कभी हम
दिल में सताओगे तुम हरदम

याद आते है मुझे ओ बेरुखे पल
जब दुनिया अँधेरी थी  हमारे बिना
कोई प्रिंस मिल गया होगा शायद
आज भी तड़पते है तुम्हारे बिना

अलबिदा ना कहना ओ मेरे गुल
लौट आयंगे तो कभी खुला है दिल
ये अचानक तूने यह क्या करदिया
अकेले छोडके हमें जुदा कर दिया