Saturday, November 18, 2017

काहे तूने याद दिलाई




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अल्फाज तेरे जो सूर में मिले 
दिल के घुमट में घूमते ही रहे 
ना कोई रुकता ना समेट  लेता 
तार मन की छेड़ता रहता 

कैसे भूले तोहे हे अप्सरा !!
तुज बिन रीती है ये धरा 
काहे तूने याद दिलाई बावरी !!
काहे तूने याद दिलाई 

मन मोरा तरसे भारी 
पलपल बरसे नयन से पानी 
नाभूल पाउ , मन को रुक पाउ 
अब बन गए हम बिरही

बित  गए दिन वो लौट ना आये
याद में हरदम तड़प ते रहे
दिन का चैन गया , रात की नींद गयी
अब जीना है याद में रेहना

ना सपने दिखाती तो भूल जाते
कैसी है ये बिरही ललना
खुद रोइ और सबको रुलाई
ये कैसी दिल में समाई