Friday, November 17, 2017

Clouds Shadow


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Clouds Shadow

The moving shadow of a cloud
Covers me, and, startled, I look up.
On seeing the funny shape of that cloud,
My heart becomes light, tends like a bubble

Towards it and the blue space beyond.
I am instantly overwhelmed
By the grandeur of the infinite sky
And the earth spread up to horizon,

As if trying to sip its blue!
Involuntarily I  get attuned
To the gentle humming of the wind
Among the rippling  blades of grass,

Who urge me to lie down on their bed,
Their tickling brings warmth to my cheek,
Making me relaxed, filled with a feeling
Of getting melted and dissolving

To become a part of something  I can't name,
But it matters not, as I now feel
That very cloud  moving through me,
How my heart gets drenched in its shower!

बादल छाया

अथांग फैले  भू  पर सुन्दर, मेघ छाया विरहे ,
मोह लिया मन के भीतर , मै लगा उसे नहारने
अलग विलग आकार उनके ,बार बार बदले
हो गया मै भी हलके तरंगे , जैसे पानी में बुलबुले

आसपास नीले नभ में, चाहे जितना दूर
धुंद मन विरह पवन पर , जैसे तितली फैले पर
अनंत आकाश के हृदय के, स्पंदन भरे मुझ में
नयन  देखे यहासे दूर , बहु मिले क्षितिजसे

नील नभ के घुट मेघने , जैसे पि लिए
जैसे मैं घुल मिला , हम उनके बन गए
लहराती हुई हवाके , हम बन गए झोके
जैसे नाचे घास के,  हरे भरे पत्ते पौधे

कैसे मन को मोह लिया, घास के नरम दुलईने
स्पर्श गुदगुदी हर्षभरा , जान लिया गालोने
बन गया मैं सुख भरा , भाव मन में नाचे
जैसे की मैं रम गया ,  पुरे अंग में साझे

किसी सुख का अंग बनाना , हम क्या कहे
पर इसमें सारा आनंद भरा , यही हमें भाये
हर एक बदली मन में घूमे , जैसे आसमान में
और उसमे भीग जाए , हलके फवारोमे