Wednesday, February 28, 2018

का मन निमाले ?


यह कविता पहले मराठी में लिखी बाद में हिंदी भाषांतर किया।
का मन निमाले ?

दूर दूर चली गयी तुम
पद निशान प्यारके छोड़के
ना देखा मुडके पीछे हमें
क्यों सबका दिल तोड़के

क्यों रूट  गयी हमपर तुम
ना हमने कभी छल किया
चुपचाप रास्ता सिधारा कपटसे
और सबका दिल चुपके चुराके

बे फक्र तेरा ये बर्ताव सजनी
मेरे मन में सदा सताता
पल पल दिलमे यादे बरसती
सारी पुरानी घुलमिलके

मेरी दुनिया तुज जैसी सवारी
लेके तेरा हुस्न ओ बावरी
तेरे जैसा ना दुनिया में कोई
शालीन मनभावन कोई सावरी
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मराठी

दूर दूर जाताना
भासती तुझी पावले
ना पाहिले वळून मागे,
का मन गे निमाले

रुष्ट ना झाली अशी तू,
नसे मागल्या गतकाळी,
चोरून वाट सुधारली,
हृदय हे पळवून गेली

बेफिकीर तुझे वे वागणे
जरी सलते मनात माझ्या
तू आठवते क्षणोक्षणी
ठेवून स्मुर्ती जुन्या

आकारले विश्व्  माझे
घेऊन तुझे सौंदर्य
परी सर ना तुझी कुणा कधी
वेगळेच तुझे ते गाम्भीर्य
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दूर दूर चली गयी तुम
पद निशान प्यारके छोड़के
ना देखा मुडके पीछे हमें
क्यों सबका दिल तोड़के

क्यों रूट  गयी हमपर तुम
ना हमने कभी छल किया
चुपचाप रास्ता सिधारा कपटसे
और सबका दिल चुपके चुराके

बे फक्र तेरा ये बर्ताव सजनी
मेरे मन में सदा सताता
पल पल दिलमे यादे बरसती
सारी पुरानी घुलमिलके

मेरी दुनिया तुज जैसी सवारी
लेके तेरा हुस्न ओ बावरी
तेरे जैसा ना दुनिया में कोई
शालीन मनभावन कोई सावरी