Thursday, March 1, 2018

पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है ( मीनाकुमारी के आवाज में )



मीनाकुमारी के आवाज में उनकी एक गजल -१ 
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है ( मीनाकुमारी के आवाज में )
https://www.youtube.com/watch?v=-dXxlVa5yho

पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की सदके की सहर होती है

सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीन तर होती है

जैसे जागी हुई आँखों में चुभें कांच के ख़्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है

गम ही दुश्मन है मेरा, गम ही को दिल ढूँढ़ता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है

एक मरकज़ की तलाश एक भटकती खुश्बू
कभी मंजिल कभी तम्हीद-ए-सफ़र होती है
मायने:
मरकज़=फोकस करना; तम्हीद=आरम्भ