Thursday, March 1, 2018

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता ( मीनाकुमारी के आवाज में))मिना -१

( Free translation of Meena Kumar's poem ....Tukde tukde din bita)

In pieces pieces the day gone, 

In pieces pieces the day gone, 
perforated patches of night I got,
How much is the heart  widen
that much gifts all we can get

in mizzle drizzle drops, 
poison as well elixir is
eyes smiled and heart cried
this the real raining price

if desired recognise the mind,
and smiley voice heard then
as if someone guide whom
again you defeated mine me

why addict rob and how,
pass the day in moments and hours
when the heartily partner I got  
uneasy then the time brought

till the elixir came to lips
not known how he pretended
in burning and assuage eyes
only the artless love in my right

( translated and image painted by Chandrakant ie lyriconlife.com)

https://www.youtube.com/watch?v=Gm6Be8-qDlk

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता ( मीनाकुमारी के आवाज में)मिना -१ 

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली

जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा-सी जो बात मिली 
(शायरा- मीना कुमारी ) https://www.youtube.com/watch?v=Gm6Be8-qDlk


.........................................



जिंदगी तो दिन में बटी है 
पल हर तो ख़ुशी से जीना 
मिलता कोई सच या झूठा 
उसको मन में ना ढलना है 

ना कोई अपना या पराया 
सब अपने है औष सारे 
सब में ख़ुशी है भरना सच है 
परमात्माके सब औष है 

दिल में जाखडा लो सबको अपने 
बदल डालो दुनिया सारी 
ढूंढो आनंद अंदर मन में 
कोई पराया अब नहीं