Tuesday, March 20, 2018

पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है ( मीनाकुमारी के आवाज में )(मिना २० )



English translation given
मीनाकुमारी के आवाज में उनकी एक गजल -१ 
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है ( मीनाकुमारी के आवाज में )
https://www.youtube.com/watch?v=-dXxlVa5yho

पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की सदके की सहर होती है

सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीन तर होती है

जैसे जागी हुई आँखों में चुभें कांच के ख़्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है

गम ही दुश्मन है मेरा, गम ही को दिल ढूँढ़ता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है

एक मरकज़ की तलाश एक भटकती खुश्बू
कभी मंजिल कभी तम्हीद-ए-सफ़र होती है
मायने:
मरकज़=फोकस करना; तम्हीद=आरम्भ  


how I endure the life

You ask, how I endure the life, then listen
the blossoming night is journey of yearn

respiration can't be said as remained alive
heart only aches and the rest I in intoxication

As if in awaken eyes encroached glass pieces dreams
like wise the night of crazy lover travels

sorrow is my enemy, and heart compel to fetch sorrow
when the lovely moment has been snatched

My wandering search as to settle in peaceful fragrance

somewhere at apex of hill or some vague voyage