Wednesday, March 21, 2018

ये नूर कैसा है (मिनकुमारिके आवाज में )(मिना २१ )




https://www.youtube.com/watch?v=W8ooL82Vwv4

ये नूर कैसा है (मिनकुमारिके आवाज में )

ये नूर कैसा है। रात का सा रंग पहने
बर्फ की लाश है लावे का सा बदन पहने
गूंगि चाहत है रुसवाई का कफ़न पहने
हर एक कतरा मुक़द्दस मैले आसुका
एक हुजूम-ऐ-अपाहिज है अब-ऐ- कुसूर पर
ये कैसा शोर है जो बे-आवाज फैला है रूपा हलील चाह में - बदनामो का डेरा है
ये कैसी जन्नत है - जो चौक चौक जाती है
एक इंतज़ार ऐ मुजासम का नाम - खामोशी
और एहसास ऐ बेकरार पे ये सरहद कैसी
दर ऐ दीवार कहाँ रूह की आवारगी के
नूर की वादी तलाक लम का ये सफर ऐ ताविल हर एक मोड़ पे बस दो ही नाम मिलते है
मौत का लो -जो मुहोब्बत नहीं कहने पाओ

How the mood is wore with night colour
the frozen feeling with fire wore dress
unspoken the demands, and indignant grave cloth
every moment just a dusty tears