Saturday, March 31, 2018

मेरी याद में तुम ना आसु बहाना (मीना ३१ )



मेरी याद में तुम ना आसु बहाना (मीना  ३१ )
https://www.youtube.com/watch?v=5ixNQQbXcyU

मीना कुमारी के आवाज में उनका गाना सुनिये -आता है दिल में प्यार क्यों - फिल्म बिछड़े बालम १९४८  

https://www.youtube.com/watch?v=qDRSvhNe-xg


On my poem translation is done in English and Marathi.

अनजान था मै बावरा  (मिना-३१    )
दिल में तुम बसी  तब, मन ने पंख फैलाये
जिया अंदर परेशान हुवा, रूह को शोक भये
अनजान था मै बावरा , मै कहा और तूम  कहा
मन गम में डुब गया ,आस  दिल की छुपाऊ कहा

मन बावरा पागल हुवा, सपनो की दुनिया बसाने लगा
आंचल में सपने सो गए, निष्पाप मन तिलमिला उठा
नहीं ज्ञात था थोडासा ही ,  पखड़िया सारी  बिखर जायेगी
अचानक अलविदा कहेगी तब , भव्रे में सारी उड़ती रहेगी

दिल में झाकके देखती हो अब , मुस्कान कलियाँ उधेड़के
पर आसु मेरे गिरते रहते , चुपचाप रोते  रह रह के
कभी कुछ गम पलटगया , रोकना दिलको होता मुश्किल
ना देखे कोई इश्क छुपा हुवा , मन बनता जोगी मंजिल

====================================
हृदयात तू वसलीस तेव्हा, पंख मनीचे फडफडले,
कासावीस झाला जीव, अंतर अतीव व्याकुळले,
नव्हती जाण वेडी तेव्हा, तू कुठे अन मी कुठे,
हूणहुणले मनात सारखे, आर्त ओढ लपवू कुठे,

मन वेडे विषण्य झाले,स्वप्नांनी जग वेढले,
कुशीत तुझ्या स्वप्न झोपले,निरागस मनी लव हसले,
नव्हती जाणीव अल्प तेव्हा, पाकळ्या सार्या विस्कटतील ,
अचानक तू जाशील तेव्हा, सारख्या भटकत राहतील,

डोकावते तु अजून मनात, स्मित कळ्या उधळून,
पण अश्रू माझे ओघळतात, हुंदके सारखे दाबून,
क्वचित एखादा भाव उलटला, बांध फोडून होतो मोकळा,
कुणा ना दिसावे प्रेम कुठले, राहतो मी असाच व्याकूळला ,
When you perched inside the heart,................... mind unravel it wings
overwhelmed the mind became, ......................inherent soul held in long
were not aware the crazy mind,......................where you be and I the poor
mind scream inside loud, .............................where my yearning hide and store

vacate became the mind cave,.....................echoes of dream reflect around
in the womb then dream slept,....................calm mind pierced in ground
not aware the little I,..................................petals would scattered all over
suddenly may say good bye,......................in cyclone they rotate over

still you creep inside the mind,..................blossoming the buds of smiles
but my tears dripping down,......................shrouding my whine cried
suddenly some reminisce pushes,..............can't hold the son in throat
no one could realise my love,.................... pretending that nothing me hold
==================