Wednesday, March 28, 2018

चलेगी अकेले ना तुमसे ये नैया ( मीना २८ )



फूल और फत्तर पिच्चर का बेस्ट सिन  https://www.youtube.com/watch?v=bCzO5x_WlFI

किसी की याद में

किसी की याद में ना कोई इतना तड़पा होगा
किसी अनजान पे ना कोई इतना रोया होगा
कितने कितने जख्म दिए उफ़ ऐ अदाकारा
तुझे याद करतेही बहती है आसुओ की धारा

तेरी हर बात रहती बहती गझल की गलियोसे
तेरी आवाज थी जैसी घुमती दिल की घुमट से
गूंजती रहती रूह तन मन की हर किनारे में
दिल हमारा हांफता रहता महीने हर सालो में

तेरी हुस्न भी कोई अप्सरासे काबिले कम नहीं
तेरी नरम अंदाज पर सारी दुनिया दीवानी रही
गम की आँधियोंको तुमने बेतशा पेश किया
सपने भी देखे तो कोई तुजसा साथी न पाया

हुस्न ऐ इश्क की मिलाफ में सारा जहां पागल हुवा
उनकी की हवस ने उसका  जीना डाव पर लगा दिया
उससे भी ना तसल्ली हुई तो जान को तोल लिया
दुखियारी अदा के लिए उसको दुखियारी बना दिया

लब्जो की आहट

 लब्जो की आहट खींच रही मुझे 
जान पहचान है पुरानी उनसे 
कदम रुक गए वो ज़माना याद आया 

कैसी उदासी भरी इन लब्जो में 
फिर वही चेहरा सजता यादोमे 
आंसू नकल आये और उसकी साया 

भूल चुके थे बड़ी मुस्किल से हम 
देखके जमाने के  और गम 
फिर वाही घना अब मन में छाया 

बरसात का माहौल अब चारो तरफ से 
बुलाओ कैसे उसे उन लम्बी आह से 
क्यों तुमने आज गम को सहलाया 

वही यादें वही आवाज दोहराते है गम 
क्या ये सपने है या कोई है नया भ्रम 
मन  के सुर उसके रूह पर छाया