Friday, March 16, 2018

हाँ, कोई और होगा (मिना १६ )


16.
हाँ, कोई और होगा (मिना १६ )
हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगा
हम नहीं आग से बच-बचके गुज़रने वाले

न इन्तज़ार, न आहट, न तमन्ना, न उम्मीद
ज़िन्दगी है कि यूँ बेहिस हुई जाती है

इतना कह कर बीत गई हर ठंडी भीगी रात
सुखके लम्हे, दुख के साथी, तेरे ख़ाली हात

हाँ, बात कुछ और थी, कुछ और ही बात हो गई
और आँख ही आँख में तमाम रात हो गई

कई उलझे हुए ख़यालात का मजमा है यह मेरा वुजूद
कभी वफ़ा से शिकायत कभी वफ़ा मौजूद

जिन्दगी आँख से टपका हुआ बेरंग कतरा
तेरे दामन की पनाह पाता तो आँसू होता

Yes, you might have seen someone else
we are not fearful to blame by their burning flames

no a await, no a beckon, no a desire, no expectation 
life is such way that goes on insensitive feel

saying so night assuaged in drenched cold
pleased moments, sorrow companion , in your empty hands

yea the matter was different, but happened something else
and staring in eyes complete night banished

my life is a crowd of many ravel sensitive thoughts
sometimes blaming goodness and sometime it praises

life is like torn pieces of ill sensitive tears
if could live under your shelter then weep real tears. 

देखा होगा तुमने किसी और को
हमें ना डर बेनाम बदनामी की आग का

न इन्तज़ार, न आहट, न तमन्ना, न उम्मीद
ज़िन्दगी है कि यूँ बेबस हो जाती है


इतना कह कर बीत गई हर ठंडी भीगी रात
सुखके लम्हे, दुख के साथी, तेरे ख़ाली हात

हाँ, बात कुछ और थी, कुछ और ही बात हो गई
और आँख ही आँख में तमाम रात हो गई

कई उलझे हुए ख़यालात का मजमा है यह मेरा वुजूद
कभी वफ़ा से शिकायत कभी वफ़ा मौजूद

जिन्दगी आँख से टपका हुआ बेरंग कतरा
तेरे दामन की पनाह पाता तो आँसू होता
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मोडून काय मिळाले घरटे माझे तोकडे  
इवलेसे येणार होते पिल्लू तयात एक लाडके 
ममता मनात मेली सांगू कशी कुणा मी 
नव्हते जवळचे तसे आपले म्हणून कोणी 

निर्मात्यांना होती चव फुटक्या पैशांची 
लावण्याची आस दाखवून दमडी जमवण्याची 
नव्हती प्रीती वा आपुलकी जी हृदयाची ठेव 
तलाक तीनदा म्हणून खोटी जिव्हाळ्याची आन 

एकटी नारी, उभी एकटी, वळती विविध नजारा 
वेदना तिच्या ना कुणा समजल्या, पैशासाठी मांजरा 
दुःखाची छटा म्हणून उमटली लाटले जनतेचे अश्रू 
पोटे याची भरले मात्र तिचे केविलवाणे रक्ताश्रू 

विव्हलाले जग कितीही तमान कुणा त्याची
जीवन हे भोग समजून ,  कुणाची काय भीती

ना तुला ना मला