Friday, March 9, 2018

मेरे महबूब (मिना -९ )


(मिना -९ )

मेरे महबूब
जब दोपहर को
समुन्दर की लहरें
मेरे दिल की धड़कनों से हमआहंग होकर उठती हैं तो
आफ़ताब की हयात आफ़री शुआओं से मुझे
तेरी जुदाई को बर्दाश्त करनें की क़ुव्वत  मिलती है
मायने:  क़ुव्वत  = ताक़त, बल, क़ुवत


My Beloved

Oh !! my beloved
when tidal waves of ocean in the noon 
synchronised with my heightened craves 
cavity created in my all vacuum of skies
give energy to endure 
your ignorance and isolation
to
hold sighs and  confined sobs

गुजरे हुवे जमाने

गुजरे हुवे जमाने , फिर लौट के ना आये 
हम इंतज़ार करके, थक गए दिल सवारे 
उम्मीद क्या करे हम, जिसे खुद ना हो सहारे 
दिल टूट के बिखर गया है, खुद को कैसे संभाले 
     गुजरे हुवे जमाने , फिर लौट के ना आये

ओ यादो के  सुके पल , क्या तुम लौटा सकोगे ?
उम्मीद ये जवा है  , काश कुछ तुम करोगे    
ना भूल गए ओ गम ,  इतना तो नहीं है दम 
अब आसुओ के सहारे , जी रहे है हम हरदम 
     गुजरे हुवे जमाने , फिर लौट के ना आये

तुम ना याद करना , आदत हम है संभाले 
रो रो के दिल फत्तर हुवा,  फिक्र तुम ना करना     
तेरे दिल की हर धड़कन , मेरे रूह से गुजरती है 
उसी पद को माहिर हूँ मै , तुम फिक्र  ना करना
     गुजरे हुवे जमाने , फिर लौट के ना आये

तेरी आसुओ की नदीमे, तैराक बन गया हूँ 
बिना पतवार चल रही है, मेरी नैया बेदिशामे 
     गुजरे हुवे जमाने , फिर लौट के ना आये