Tuesday, March 13, 2018

सियाह नक़ाब में In beautiful veil (मिना १३)




This poem in Urdu is translated into English as well as in Hindi for G+ friends

In beautiful veil her frozen face
as if in dim moonlit
in wrecked house 
open and enlightened 
where the candle flame ignited
silent
speechless wax candles
or
that golden book of skin
which yearning of lingering love 
that's of holy stanza is chosen
is a pure scene
In beautiful veil her leather face 
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सियाह नक़ाब में उसका संदली चेहरा
जैसे रात की तारीकी में
किसी ख़ानक़ाह का
खुला और रौशन ताक़
जहां मोमबत्तियाँ जल रही हो
ख़ामोश
बेज़बान मोमबत्तियाँ
या
वह सुनहरी जिल्दवाली किताब जो
ग़मगीन मुहब्बत के मुक़द्दस अशआर से मुंतख़िब हो
एक पाकीज़ा मंज़र
सियाह नक़ाब में उसका संदली चेहरा
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एक सुन्दर ढकी चुनरीमें उसका स्थितप्रज्ञ चपराक  चेहरा 
मंद चाँदनी रात के मित  प्रकाशमे 
खण्डर जैसे फकीरी निवास में 
जहा एक मोमबत्ती जल रही हो 
खामोश 
बेजबान मोमबत्तिया 
वह सुनहरी मुलायम चमड़ेवाले पन्नो की किताब 
जो अधूरे मुहोब्बत के गम से भरी हुयी 
वही पवित्र कविताओं की पंक्तिया चुनी गयी 
यही सच है सत्य दृश्य ( चित्र) 
एक सुन्दर ढकी चुनरीमें उसका स्थितप्रज्ञ चपराक चेहरा