Saturday, March 3, 2018

आबलापा कोई इस (मीना -२ )




मीनाकुमारी की गजल -१ 
( free translation in Eglish the Meena Kumari's Poem...Aablapa koi is )

With blister feet who arrived in this forest
otherwise who could enlighten lamp in this thunder

particle particle have joined childish prayer
each one idol, God might have prepared

burning thirst of thorns must have assuaged
leaking palm of hand mst have decorated

whether could get the golden stone
our broken heart could once reminisce 

 the bleeding splatter must not be cleaned on path

the loneliness must be done garden by someone


आबलापा कोई इस (मीना -२ )
आबलापा कोई इस दश्त में आया होगा 
आबलापा कोई इस दश्त में आया होगा
वरना आंधी में दिया किस ने जलाया होगा

ज़र्रे ज़र्रे पे जड़े होंगे कुंवारे सजदे
एक एक बुत को खुदा उस ने बनाया होगा

प्यास जलते हुए काँटों की बुझाई होगी
रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा

मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर
अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा

खून के छींटे कहीं पोछ न लें राहों से
किस ने वीराने को गुलज़ार बनाया होगा
 मायने: आबलापा=जिसके पैरो में छाले हो, दश्त=जंगल 
(शायरा- मीना कुमारी )
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बचपन की प्यास (मीना-२) 

बचपन की प्यास जब रहे अधूरी
प्यार की आस पल पल रोइ
जैसे उमर  बढे धीरे धीरे
प्यार की प्यास विशाल होये

हर एक आँख में ना कुछ मिले
बदक को ना पता ओ राजहौंस है
कोई हुस्न अनमोल परी कहे
पर प्यास तो रो के अधूरी रहे

जुल्मी दुनिया का अर्थ से मतलब
कोई ना सोचे लाडले  के लब्ज
मिल जाए कोई इश्क का राजकुमार
जो भर दे आसमान भरा प्यार

चंद्रकांत (lyriconlife.com )