Tuesday, April 3, 2018

अकेला मै यहाँ

अकेला मै यहाँ 

खुदाने उसको इतना सुन्दर बनाया 
के साया भी उसकी अभी है ज़िंदा 
कही सासे बनके रूह में रोती  रहती 
तनहा जिंदगी हमेशा मुसमुसाती 

तस्बीर बनके अभी है मंडराती 
रंग संग लेकर मेरे कागज़ पर आती 
लोगोने कितने होंगे आंसू बहाये 
अदाओ की जिंदगी मन में बसाये 

नाजुक परिसे थी मनमें मुलायम
आंसू हमेशा सजाते थे हरदम   
खाबोकि रानी जबसे बनी थी 
शर्माता था में अदब को सवारे 

ना पता था कहेगी अलविदा जल्दी 
काश कुछ मन का गम कह पाते 
सुन्न हो गयी सब दिन और राते 
सपने भी दफा हुवे अलविदा कहके 

झूटी है दुनिया झूठे ये परवाने 
किसपे ना भरोसा, लगता बेसहारे 
अल्बम जैसे सब नकली चहरे 
अकेला मै यहाँ अकेला मै यहाँ