Friday, April 6, 2018

अन्तर्जाती विवाह

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अन्तर्जातीय  विवाह

भारत जैसे अंखंड देश में वैदिक काल से चार वर्ण व्यवस्था प्रचलित रही। उसमे भी कार्यानुसार जाती का निर्माण हुवा।  उन निर्माण हुवे जाती में भी विभिन्न प्रकार की उच्च नीच ता का  प्रभाव रहा। और उसी प्रमाण को सत्य मानते हुवे  समाज में गर्व महसूस करने लगे।  श्यादि ब्याह के समय अपनी जाती की प्रगल्भता पर शिष्टाचार  को ज्यादा जोर मिला। वर पक्ष के लोग वधुपक्ष पर रौब जमाते रहे।  यह रौब आपसी बोलचाल में भी प्रगट अभीभी प्रगट हो रहा है।

वधु पक्ष के लोग हमेशा गर्दन झुकाये , बहोत नरमी से पेश आते है और आने चाहिए इसके लिए वधुको हर  प्रकार तसदी देनेका प्रयास चलता है।  स्त्री नरम स्वभाव की होनेके कारण माता पिता को हमेशा चिंता करनी पड़ती है। और शादीके बाद तसदी ना देनेके लिए , किसी दूसरे कारण  बताकर दहेज़ प्रथा सर्व मान्य बनी हुवी है।  इसके बाद भी सुखी जीवन की ग्यारंटी नहीं रहती।  सास बहु को कमरेमे नहीं भेजती।  ऐसे  जातिवादी  समाज में रेहनेके बजाय अंतर जातीय विवाह ज्यादा श्रेयस्कर है।

हर जाती के लोगोके थोड़े थोड़े अलग गुणधर्म पाए जाते है।  छोटे कुटीरोद्योग करने वाले समझौता कर लेते है।  कुछ कार्य करनेका जूनून उनमे रहता है। घर में रहन सहन थोड़ा पुराना गरीब रहता है। छोटी छोटी बातो पर वादविवाद हो सकता है  लेकिन स्वच्छ हृदयके रहते है।

मध्यम स्तर के लोग बहोत समझदारिसे बच के बचाके जीवन व्यथी करते है  पैसो की अड़चन बुरी तरह से सताती है। और तौर  तरीके सम्भालनेमे बहोत कठोर होते है।  खुद को बड़े रूढीबाज , बड़े लोगोसे सम्बद्ध बताते रहते  है। खुदको बड़े प्रतिभा संपन्न समझते है  . यह बहोत बुरी दूरदशमे फसे रहते है।  पर स्वाभिमान नहीं छोड़ते। जान संख्यामे सबसे ज्यादा रहते है।

तीसरा माध्यम उच्च वर्गीय समाज। ये लोग हवा में चलते है  बाकी जनता से उनक कोई सम्बद्ध नहीं रखना चाहते  . ये लोग गलत काम करेंगे लेकिन बड़ी शान से। इनके रिस्तेदार देश विदेश में रहते है तथा उच्च लोगोके साथ उनके सम्नब्ध रहते है।  समाज के लिए इनके मन में घृणा रहती है पर दिखाते नहीं।

चौथा वर्ग जो है वह है उच्च वर्ग  उनकी विशेषता जानकार आप चौक पड़ेंगे।  भारत जैसे गरीब देश को वह चलाते है इसका उन्हें गर्व रहता है तथा एक प्रकारकी दया भी आती है। ऐसे गरीब देशमे वे बड़ी मुश्किल से दिन काटते है। इसलिए हमेशा परदेश में घर बनाकर रहते है।  देश के लिए उनके मन में बहोत प्रेम जाग उठता है पर दिखावेके लिए।

इसलिए ये सब भेद मिटाना आवश्यक है।  अंतर जातीय विवाह यह सब कर सकता है। इसमें इस्लाम छोडके बाकी जाती के बारेमे विचार हो सकता है।  क्यों की उनका बर्ताव हिंदू धर्म से अलग है।  यह लेख सिर्फ हिंदू के अलग अलग जातिके बारेमे लिखा  है।