Monday, April 2, 2018

भूल गयी ये सजनी


भूल गयी ये सजनी 

भूल गयी ये सजनी 
याद परायी हो गयी
रो के भी ना मिल सके 
ना दुश्मन भी ना बना सके 

कैसी जिंदगी जीना कहो 
नजर भी इतनी  पराई हुई 
ग़ुस्सा भी करलो चाहो 
ओ भी मिठास हमें सही  

क्यों इतना जो प्यार दिया 
इतना तड़पाना कैसे आता 
खंजर लाके मार दो हमें 
ओ भी हमें अक्सर  भाता 

कोमल तुम्हारा तन और मन 
इतना कठोर कैसे बना
फुलसी तुम हो कोमल सजनी 
फत्तर दिल क्यों कैसे बनी  

चाहो तो मै बैरागी बन जाऊ 
नाम तुम्हारा जपता रहु 
आसु की समंदर में डुब जाऊ 
पर दिल में सिर्फ पूजता रहु