Saturday, April 7, 2018

भूल गयी सारी दुनिया



भूल गयी सारी दुनिया भूल गए राही 
रोते थे अदाओपे अब भूल गए सभी 
तेरे लब्ज से घूमती आवाज की गुंजन 
दिल की आसमान में मंडराती है अभी 

अधूरी खिली हुई कली के सामान 
तेरी अदाओ जालिम की पेशकश 
दिल को चिर जाती थी हमेशा 
जैसे मन में बढ़ा देती थी हवस 

तितली भी पागल हुयी हुस्न पे तेरे
फूल भी शर्माने लगे लाज के मारे
तेरे गालो के गुल थे इतने जो भारी
भ्रमर भी मारे फेरे बारम्बारी

इसी कारण तू सबको लगे प्यारी प्यारी
मोहनी डाली तूने दुनिया पे निराली
आज भी सासे अहसास के लिए रुकती है
पलकों के किनारे गीले हो जाते है